Tuesday, August 25, 2009

कुछ कुछ होने लगा अब काशीपुर में

काशीपुर के कुमून गडवाल चैंबर ऑफ़ कामरस में एक्सपोर्ट और इंपोर्ट सुब्जेक्ट को लेकर एक बहुत ही अच्छी वर्क शॉप हुई इसमे देहली से आए हुए अनेक विद्वान् प्रोफ़ेसर ने अपने भाषण दीये। आई आई एम् के स्टूडेंट्स ने इसमे काफी इंटेरेस्ट लिया पुरे समाचार के लीये।
www.garhwalpost.com mein jaa kar search mein kashipur find kar pura news padle.
Prem Arora
prem.voi@gmail.com
9837793421
9012043100

Sunday, February 22, 2009

इसे दो दिन जो त्यौहार जो दिल को छू गए

उत्तराखंड के काशीपुर नगर मैं एक मन्दिर है जिसे मोंतेश्वर बाबा का मन्दिर कहते हैं। कहा जाता है कि महाभारत कल मैं इस मन्दिर का निर्माण हुआ था। २३ तारिक को अब महाशिवरात्रि पर यहाँ पार लगभग २ लाख से भी ऊपर कांवर चद्ती है। यह सभी शिव भगत कांवर लेन वाले हरिद्वार से पैदल चल कर गंगा जल यहाँ पर ले केर आते हैं। बात यह नही है दरअसल जो नजारा देखने को मिला वोह अलग लगा। काशीपुर और जसपुर के बीच एक मजार पड़ती है। बाबा शेर शाह की। इस मजार पर हिंदू, मुस्लिम, सिख सभी धरम माथा टेकने आते हैं। इस मजार पर शिव भगतों के लिए लेंगर का इंतजाम किया गया था। मुस्लिम क्या और सिख क्या सभी कांवर लेन वालों की सेवा मैं लगे हुए हैं। यह बात इस लिए कहनी पड़ी कि अभी कुछ दिन पहले देवबंदी समाज का इत्ज़मा का प्रोग्राम होना था जसपुर मैं परन्तु जसपुर के बरेलवी समुदाय के मुस्लिम लोगो ने जब इस प्रोग्राम के लिए जगह देने को मन डर दिया था तो बहेरी गाँव के हिंदू लोगो ने समेलन के लिए पुरी जगह दी और मन्दिर मैं मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए पानी और भोजन का इंतजाम किया गया। इस प्रोग्राम मैं भी लगभग एक लाख से ऊपर लोग शामिल थे। आज इस बात को इस लिए कहना पड़ रहा कि चाहे तालिबान और पाकिस्तान एक हो जायें पर जो मिसाल काशीपुर और जसपुर मैं देखने को मिली। यह कट्टरपंथी तनाव फैलाने वाले लोगों के मुंह पर एक करार तमाचा जरुर है। इश्वर सभी को ऐसी ही सद्बुधी बक्शे। आप भी एकता की मिसाल का किस्सा ब्लॉग पर लायें। ता कि दूरियों को और कम किया जा सके।