Tuesday, May 20, 2008

उत्तराखंड से लगाव क्यों? भाग २

उत्तराखंड मैं अनेक संचार पत्रों मैं कम करने का मौका मिला । सबसे पहले दैनिक दशानन से शुरुआत की। उसके बाद अनेक समाचार पत्रों के अलावा देहरादून से प्रकाशित यूगवानी, जनपक्ष आज कल, जुल्म और कानून हरद्वार से प्रकाशित दैनिक हौक हिन्दी और अंग्रेजी के लिए कम किया सीमांत वार्ता नेव्स्पपेर दैनिक के लिए कम किया। सहारा समय मैं ३ साल तक बहुत कुछ सीखा। देहरादून मैं हुए पेपर के बाद ई टी वी न्यूज़ उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मैं चुनाव हो गया। छात्र संघ मैं अनेक पदों पर रहा पूरे उत्तराखंड मैं अनेक पैदल भरमन किए । कोना कोना देखा समझा और पूरे पहाड़ की आत्मा मेरे रोम रोम मैं बस गई। उत्तराखंड आन्दोलन के दौरान अनेक साथी मिले मीडिया के मंच पर अनेक दोस्त बने। छात्र संघ मैं रहते हुए अनेक अपने हुए। अब चाहे मैं कहीं भी रहूँ पर उत्तराखंड तो मेरी सांसो मैं वसा ही रहेगा । बुरांश के फूल बांसुरी की मधुर आवाज़ हमेशा मेरे कानो मैं गूंजती रहेगी। पहाड़ की सौंधी खुशबु हमेशा महसूस होती रहेगी। सो कृपया अब मुझे दुबारा नहीं बताना पड़ेगा की मुझे उत्तराखंड से इतना लगाव क्यों है। थोड़े को ज्यादा समझाना। वरना उत्तराखंड पर तो एक महान ग्रन्थ लिखा जा सकता है और अनेक लोगो ने लिख भी डाले हैं। उत्तराखंड के रिपोर्टर साहित्यकार कवि लेखक किसी भी परिचय के मोहताज नहीं हैं। गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ।
आप का प्रेम अरोड़ा
मेरा पुराना नाम प्रेम अरोड़ा उत्तराखंडी आब सिर्फ़ प्रेम अरोड़ा तक सिमट गया है।
मेरा मोबाइल नम्बर हैं +९१ ९३५९ ८० ८३ ८१
फर्रुखाबाद